कफ दोष वाले लोगों के लिए: व्यस्त दिनचर्या में आयुर्वेदिक आहार से वजन घटाने के आसान तरीके
नमस्ते बहनों! आजकल मेरा शरीर कुछ भारी-भारी सा रहता है, और मन भी कभी-कभी थका हुआ महसूस करता है। सुबह से शाम तक घर के काम, बच्चों की देखभाल, पति-देव का ध्यान... इन सब में अपनी सेहत का ख्याल रखना जैसे भूल ही जाती हूँ। खासकर जब मौसम बदलता है या गर्मी बढ़ती है, तो यह भारीपन और बढ़ जाता है। पेट के आसपास जमा चर्बी भी अब चिंता का विषय बन गई है। मेरी दादी कहा करती थीं कि शरीर की प्रकृति को समझना बहुत ज़रूरी है।
आयुर्वेद में शरीर की तीन प्रकृतियाँ बताई गई हैं - वात, पित्त और कफ। जब कफ दोष बढ़ जाता है, तो शरीर में भारीपन, सुस्ती, आलस और वजन बढ़ने लगता है। जैसे बारिश के बाद मिट्टी में नमी और भारीपन आ जाता है, वैसे ही कफ बढ़ने पर शरीर में भी यही होता है। सुबह उठने में दिक्कत, दिन भर थकान, और मीठा खाने की इच्छा भी कफ बढ़ने के लक्षण हो सकते हैं। और हाँ, वजन बढ़ना तो इसका सबसे बड़ा संकेत है।
अब आप सोचेंगी कि इतनी व्यस्त दिनचर्या में भला कैसे इन सब का ध्यान रखा जाए? चिंता मत कीजिए, मैं आपको ऐसे आसान तरीके बताऊँगी जो हमारी रसोई में ही मिल जाते हैं। कफ को शांत करने के लिए हमें गर्म, हल्का और थोड़ा सूखा भोजन लेना चाहिए। सुबह का नाश्ता हल्का रखें। दलिया, पोहा या मूंग दाल का चीला अच्छा विकल्प है। दूध की जगह छाछ या गर्म पानी में शहद और नींबू ले सकती हैं। दोपहर के खाने में दाल, हरी सब्जियां और बाजरा या ज्वार की रोटी खाएं। चावल कम खाएं, खासकर रात में। रात का खाना सूर्यास्त से पहले या उसके तुरंत बाद हल्का ही रखें। सूप, खिचड़ी या उबली सब्जियां सबसे अच्छी हैं। ठंडी, भारी, तैलीय और मीठी चीजों से बचें। दही, पनीर और मिठाई कफ को बढ़ाती हैं।
हमारी रसोई तो जैसे जड़ी-बूटियों का खजाना है! कफ को कम करने और वजन घटाने के लिए कुछ चीजें हमेशा पास रखें। अदरक: सुबह खाली पेट एक कप गर्म पानी में थोड़ा अदरक का रस और शहद मिलाकर पिएं। यह पाचन को ठीक करता है और कफ को काटता है। हल्दी: खाने में हल्दी का प्रयोग बढ़ाएं। यह शरीर की सूजन कम करती है और मेटाबॉलिज्म को तेज करती है। शहद: चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल करें, लेकिन गर्म चीजों में नहीं। यह कफ को सुखाता है। काली मिर्च, दालचीनी, लौंग जैसे मसाले भी कफ को कम करने में बहुत सहायक हैं। इन्हें अपनी चाय या सब्जियों में डालें। पूरे दिन गर्म पानी पिएं। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। 
सिर्फ खाने-पीने से ही नहीं, हमारी दिनचर्या भी कफ को प्रभावित करती है। सुबह जल्दी उठें। कफ का समय सुबह 6 से 10 बजे तक होता है, इस समय सक्रिय रहने से कफ नहीं बढ़ता। थोड़ा व्यायाम ज़रूर करें। घर के काम भी एक तरह का व्यायाम ही हैं, लेकिन 15-20 मिनट की हल्की सैर या योग भी बहुत फायदेमंद है। रात को जल्दी सोएं और पर्याप्त नींद लें। देर रात तक जागना कफ को बढ़ाता है। दिन में सोने से बचें, खासकर दोपहर के खाने के बाद। यह कफ को और बढ़ाता है। अपने लिए थोड़ा समय निकालें, भले ही वह 10 मिनट का ध्यान ही क्यों न हो। मन शांत रहेगा तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा।
बहनों, यह सब बातें सुनने में शायद मुश्किल लगें, लेकिन धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करके आप बहुत फर्क महसूस करेंगी। हम गृहिणियों पर पूरे घर की जिम्मेदारी होती है, लेकिन अगर हम खुद स्वस्थ नहीं रहेंगी तो परिवार का ध्यान कैसे रख पाएंगी? अपनी सेहत का ध्यान रखना भी एक तरह का धर्म ही है। आज के लिए बस इतना ही। इन नुस्खों को आजमाइए और मुझे बताइए कि आपको कैसा लगा। जय माता दी!